सैकड़ों हाथों ने पहले पार्थिव शिवलिंग और फिर किया माता पिता का पूजनमांगल्य मन्दिर धर्म क्षेत्र में अविस्मरणीय आध्यात्मिक उत्सव

महाशिवरात्रि महापर्व  एवं मातृ–पितृ पूजन दिवस पावन पर्व पर मांगल्य मन्दिर धर्म क्षेत्र आध्यात्मिक उत्सव से सराबोर रहा। शिवभक्तों द्वारा पार्थिव शिवलिंग के पूजन अर्चन के साथ सैकड़ों की संख्या में बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी ने अपने अभिभावकों का विधिविधान से पूजन किया।  

श्री योग वेदांत सेवा समिति – युवा सेवा संघ महिला उत्थान मंडल रतलाम द्वारा मांगल्य मन्दिर धर्म क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में मंडल रेल प्रबंधक श्री अश्विनी कुमार सपत्नीक,महापौर प्रह्लाद पटेल, जिला उपाध्यक्ष भाजपा सोनू यादव,वार्ड पार्षद देवश्री पुरोहित, मंडल अध्यक्ष नीलेश गांधी,शिक्षाविद एवं समाजसेवी सुश्री श्वेता विनचुरकर एवं समाजसेवी श्रीमती वीणा छाजैड अतिथि रही।  

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक –

मंडल रेल प्रबंधक श्री कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में माता-पिता पूजन की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि माता-पिता पूजन का अर्थ केवल औपचारिक पूजा नहीं, बल्कि उनके प्रति प्रेम, सम्मान, समय और सहयोग देना है। उनकी भावनाओं को समझना, उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखना और कठिन समय में उनके साथ खड़े रहना ही सच्चा पूजन है। इससे परिवार में संस्कारों की निरंतरता बनी रहती है और नई पीढ़ी भी आदर, करुणा तथा कृतज्ञता जैसे मूल्यों को अपनाती है।

 मानवता का सम्मान- महापौर

महापौर प्रह्लाद पटेल ने कहा कि माता-पिता पूजन भारतीय संस्कृति की आत्मा है। शास्त्रों में वर्णित यह मूल्य आज के समय में सामाजिक संतुलन, पारिवारिक सौहार्द और मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। माता-पिता का सम्मान ही वास्तव में मानवता का सम्मान है।  

अभिमंत्रित रुद्राक्ष वितरण –
 महाशिवरात्रि पर्व पर विशेष रूप से निर्मित पार्थिव शिवलिंग का शिव भक्ति ने विधिपूर्वक पूजन किया।  जगन्नाथ पुरी के विद्वान संयमी ब्राह्मण देव श्री शारदा प्रसाद मिश्रा ने बताया कि शिव पुराण में वर्णित है कि जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसका पूजन करता है, वह अनेक जन्मों के पापों से मुक्त होकर शिवकृपा प्राप्त करता है।लिंग पुराण में भी पार्थिव लिंग की स्थापना और पूजन को सर्वसिद्धि प्रदायक कहा गया है। पूजन में महर्षि संजय शिवशंकर दवे द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार से अभिमंत्रित रुद्राक्ष का भी श्रद्धालुओं में वितरण किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भक्तजन और आयोजन समिति के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।मांगल्य मंदिर के महावीर भाई, मोहन भाई, माखन भाई, शकर भाई, मनोज मिश्रा, धर्मेश भाईसमिति के प्रेम प्रकाश बाथव ,शिव कुमार श्रीवास्तव,धर्मराज वाघेला,भगवती लाल साल्वी,शकर राठौड़, राहुल शर्मा, अनिल वर्मा, लक्ष्मी नारायण गहलोत, नकुल राज, राघव श्रीवास  आदि उपस्थित रहे। 

भाव विभोर कर देने वाले प्रसंग-
माता–पिता पूजन का दृश्य अत्यंत भावुक और हृदय को स्पर्श करने वाला रहा।जब संतानो ने  अपने माता–पिता को आसन पर बैठाकर उनके चरण पखारती रही थी तब यह केवल एक परंपरा का निर्वहन नहीं  बल्कि अपने हृदय की कृतज्ञता की अभिव्यक्ति रही। बच्चों ने जब उनके चरणों में पुष्प अर्पित कर तिलक लगाया है और आरती उतारी तब माता–पिता की आँखें नम हो उठी । उस क्षण में त्याग, तपस्या और प्रेम की अनगिनत स्मृतियाँ मानो साकार हो गई। इस भाव विभोर कर देने वाले प्रसंग में पूजन के बाद जब बच्चों ने माता पिता की परिक्रमा कर उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया तब माता–पिता का करुणामय स्पर्श जीवनभर का संबल बन गया । यह प्रसंग केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि संस्कार, कृतज्ञता और परिवारिक एकता का जीवंत उत्सव बन गया। जिसका आयोजन पूज्य बापूजी की प्रेरणा से प्रतिवर्ष 14 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किया जाता है।

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