बैजनाथ महादेव मंदिर कुंड में अब नहीं दिखेगा शुभता का प्रतीक विशाल कछुआ

करीब 200 वर्ष उम्र की मादा कछुआ छोटा कुंड में मृत मिली

उज्जैन। ( News SSR )आगर-मालवा जिला मुख्यालय पर स्थित भगवान बैजनाथ महादेव मंदिर परिसर में स्थित छोटे कुंड के निवासी करीब 200 वर्ष का विशालकाय मादा कछुआ अब कभी श्रद्धालुओं को दिखाई नहीं देगा। भगवान के दर्शनों के बाद यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु आस्था एवं शुभता के प्रतीक इस कछुआ के दर्शन भी यहां करते थे। मादा कछुआ शुक्रवार को कुंड में मृत मिली है। पोस्टमार्टम के बाद उसे वन विभाग ने विभागीय प्रक्रिया के तहत अंतिम संस्कार किया है।

एसडीओ वन फतेहसिंह निनामा के अनुसार शुक्रवार को एसडीएम राजस्व एवं तहसीलदार की सूचना पर वन विभाग का अमला बैजनाथ महादेव मंदिर परिसर पहुंचा था। यहां छोटे कुंड में कछुआ पानी की सतह पर निष्क्रिय अवस्था में मिला था। कछुआ को बाहर निकाल कर पशु चिकित्सक के पास ले जाने पर उन्होंने उसे मृत घोषित कर दिया । नियमानुसार कछुआ का पोस्टमार्टम करवाया गया मादा कछुआ करीब 70-80 किलो वजन एवं करीब 150 से 200 साल उसकी उम्र का आंकलन किया गया।

15 दिन पूर्व 7 कछुआ को हटाया गया-

 एसडीओ निनामा करीब 15 दिन पहले मंदिर परिसर के कमलकुंड से हमने 7 कछुआ को पकडकर मोतीसागर तालाब में छोडा था। कुंड की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण ऐसा किया गया था। उसी समय में हमारे द्वारा दुसरे छोटे कुंड के इस कछुआ को भी पकडकर छोडने की कवायद की जा रही थी जिस पर मंदिर के पंडित ने आपत्ति ली थी। यहां तक की कुंड का पानी बदलने की बात भी कही गई थी। इसके चलते कछुआ को वहीं पर छोड दिया गया था।

पशु चिकित्सक के अनुसार प्राकृतिक मौत-

बकौल पशु चिकित्सक अरविंद महाजन मेरे पास वन विभाग का अमला विशालकाय मादा कछुआ को मृत अवस्था में लेकर आए थे। करीब 70 किलो वजनी मादा कछुआ थी। विश्लेषण के आधार पर उसकी उम्र 150 से 200 साल के लगभग रही है। कछुआ की मौत नेचुरल रही है। उसके शरीर के अंग काफी नाजुक स्थिति में आ गए थे। उसकी सेंपलिंग की गई है।

विशालकाय कछुआ पहचान बन चुका था-

छोटे कुंड का यह कछुआ बैजनाथ महादेव मंदिर की पहचान बन चुका था। मंदिर आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक वर्षों से इसे देखकर शुभता की भावना रखते थे। इसके चलते यह आस्था का केंद्र भी था। कुछ समय पूर्व कमलकुंड के कछुआ को पकडकर मोती सागर तालाब में छोडने के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक आस्था और भावनाओं के चलते इस वृद्ध कछुए को कुंड में ही रहने दिया गया था। बाद में उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने की योजना भी बनाई गई थी। लेकिन उससे पहले ही उसकी मौत हो गई।

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