
आलोट। 02अगस्त 2026 ( News SSR )नगर से करीब स्थित कनक पर्वत की तलहटी में बना अनादिकल्पेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र ही नहीं, बल्कि दूर-दूर से आने वाले शिवभक्तों की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है।

प्राचीन मान्यताओं, प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक महत्व के कारण यह धाम सावन माह में विशेष रूप से श्रद्धालुओं से गुलजार रहता है। यहां पहुंचते ही श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं और भगवान शिव के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं।

मान्यता है कि अनादिकाल से स्थापित इस मंदिर में विराजित शिवलिंग स्वयंभू है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार राजा नल ने इसी स्थान पर कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव यहां प्रकट हुए। तभी से यह स्थान शिवभक्तों के लिए श्रद्धा और विश्वास का केंद्र बना हुआ है।
तीन ओर से पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता का भी अनुपम उदाहरण है। पर्वतों पर फैली हरियाली और दुर्लभ वनस्पतियां इसकी रमणीयता बढ़ाती हैं। मंदिर परिसर में स्थित पवित्र कलेवर कुंड भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। मान्यता है कि इस कुंड का जल चर्म रोगों में लाभकारी माना जाता है।
मंदिर से जुड़ी एक अन्य मान्यता रामायण काल से जुड़ी है। कहा जाता है कि लक्ष्मण को शक्ति लगने के बाद संजीवनी बूटी लेने जाते समय भगवान हनुमान ने हिमालय से लाए पर्वत को कुछ समय के लिए यहां रखा था, जिसका एक भाग आज कनक पर्वत के रूप में विद्यमान है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि वर्ष में एक बार यह पर्वत कुछ क्षणों के लिए स्वर्णिम आभा बिखेरता है, इसी कारण इसका नाम कनक पर्वत पड़ा। पर्वत पर भगवान हनुमान के चरणचिह्न तथा विश्राम मुद्रा में उनकी प्रतिमा भी स्थापित है।
मंदिर परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। स्थानीय मान्यता के अनुसार इस मंदिर की न तो कोई नींव है और न ही इसके निर्माण से जुड़े ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध हैं, जिससे यह मंदिर रहस्य और श्रद्धा का विषय बना हुआ है।
सावन माह में अनादिकल्पेश्वर महादेव मंदिर में धार्मिक आयोजनों की विशेष धूम रहती है। पूरे माह अखंड ‘ॐ नमः शिवाय’ जप, भगवान शिव का आकर्षक श्रृंगार, महाआरती और महाप्रसाद का आयोजन किया जाता है। सावन के तीसरे सोमवार से भगवान अनादिकल्पेश्वर महादेव की पारंपरिक सवारी निकाली जाती है, जो भाद्रपद माह के दूसरे सोमवार तक जारी रहती है। अंतिम सवारी में हजारों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान भोलेनाथ के जयकारों से पूरे क्षेत्र को शिवमय बना देते हैं।
धार्मिक आस्था, प्राचीन मान्यताओं और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम होने के कारण अनादिकल्पेश्वर महादेव मंदिर आज मालवा अंचल के प्रमुख शिवधामों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है। विगत कई वर्षों से मंदिर का जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा हे समिति के द्वारा शिवभक्तों के सहयोग यह भव्य ओर दिव्य मंदिर बन रहा हे जो शिव भक्तों के ओर आलोट ओर क्षेत्र वासियों।के लिए बहुत ही खुशी की बात हे ।