पालना व 14 स्वप्नों की बोलियों में श्रद्धालुओं ने लिया उत्साह से लाभ

नागेश्वर। ( News SSR )पर्युषण महापर्व के पावन अवसर पर प्रसिद्ध श्री नागेश्वर तीर्थ में भगवान महावीर स्वामी का जन्म वाचन समारोह श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर धर्मसभा में परम पूज्य साध्वी श्री राजरत्नाश्रीजी म.सा. ने कल्पसूत्र का वाचन करते हुए भगवान महावीर के जन्म एवं उनके जीवन प्रसंगों का वर्णन किया।
साध्वीजी ने कहा कि तीर्थंकर परमात्मा के जन्म के समय नरक में रहने वाले जीव भी सुख का अनुभव करते हैं। भगवान महावीर की माता त्रिशला देवी ने गर्भकाल में दिव्य चौदह स्वप्न देखे थे। इन स्वप्नों की फलश्रुति के रूप में श्री वीर प्रभु का तीर्थंकर के रूप में जन्म हुआ। उन्होंने अपने दिव्य तप, त्याग और ज्ञान के माध्यम से जगत का कल्याण किया।
उन्होंने कहा कि प्रभु जन्म से ही तीन ज्ञान के धारक थे। उन्होंने बाहरी शत्रुओं का नहीं, बल्कि अपने भीतर के क्रोध, मान, माया और लोभ रूपी कषायों का नाश किया और जगत के उद्धारक बने। उनके जीवन का संदेश आत्मकल्याण के साथ-साथ परकल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
बैंड-बाजों के साथ निकली भव्य रथयात्रा
प्रवचन के पश्चात दोपहर में भगवान महावीर स्वामी की भव्य रथयात्रा निकाली गई। नूतन रथ, घोड़ों और बैंड-बाजों के साथ निकली यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई पुन: तीर्थ परिसर पहुंची। रथयात्रा में स्थानीय श्रीसंघ के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से आए सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
श्रावक-श्राविकाएं भक्ति गीतों पर नृत्य करते हुए और जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। महिलाओं ने भगवान के रथ के आगे अक्षत की गहुली कर मंगल भाव से बधाया। पूरे मार्ग में वातावरण भगवान महावीर के जयघोष से गूंजता रहा।
पालना झुलाने और चौदह स्वप्नों की लगी बोलियां
रथयात्रा के पश्चात समग्र श्रीसंघ आराधना भवन में एकत्रित हुआ। पूज्य साध्वीजी की निश्रा में भगवान महावीर स्वामी के जन्म से पूर्व माता त्रिशला देवी द्वारा देखे गए चौदह स्वप्नों को झुलाने तथा भगवान के पालने की बोलियां लगाई गईं। धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने मुक्तहस्त से बोलियां बोलकर लाभ लिया।
बोलियों के पश्चात साध्वीजी ने भगवान महावीर के जन्म वाचन का विस्तृत वृत्तांत सुनाया। जन्म वाचन के दौरान श्रद्धालुओं ने नारियल बधारकर और एक-दूसरे को बधाई देकर अपनी खुशी व्यक्त की। इस दौरान श्रद्धालुओं को कंकू-केसर के छापे व तिलक लगाए गए। समारोह के समापन पर लड्डू की प्रभावना वितरित की गई।

इंदौर के जैन परिवार ने लिया पालने का लाभ
तीर्थ पेढ़ी सचिव धर्मचंद जैन ने बताया कि प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी गुजरात निवासी दोसी रिखबचंद त्रिभुवनदास परिवार, सूरत की ओर से साधर्मिक वात्सल्य का आयोजन किया गया। वहीं प्रसिद्ध नागेश्वर तीर्थ में भगवान के पालने की बोली का लाभ इंदौर निवासी कुसुम, रोहित कुमार,नीलम जैन परिवार ने लिया।
भक्ति संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
सायंकाल प्रतिक्रमण के पश्चात भक्ति संगीत का आयोजन किया गया। इसके साथ ही बालिका मंडल की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। बालिकाओं की प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। पूरे आयोजन के दौरान नागेश्वर तीर्थ परिसर भगवान महावीर की भक्ति और जयकारों से गूंजता रहा।