
रतलाम, 01 नंबर ( News SSR )। जिले के आदिवासी बहुल ग्राम रावटी में आदिवासियों के सामूहिक धर्मान्तरण का मामला सामने आया है,जंहा एक बंद कमरे में बड़ी संख्या में आदिवासी महिला पुरुष और बच्चो को एकत्रित करके उन्हें ईसाई धर्म की शिक्षा देकर मतांतरित करने का प्रयास किया जा रहा था। मामले की जानकारी मिलने पर हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ता और रावटी थाना पुलिस मौके पर पहुंची, जहां से भारी मात्रा में धार्मिक साहित्य एवं बाइबल की किताबें बरामद की गईं। मध्य प्रदेश में धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2021 लागु होने के बावजूद अब तक पुलिस ने इस मामले में कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया है। पुलिस द्वारा मामले की जाँच किये जाने की बात कही जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं को गुप्त सूचना मिली थी कि तलय चौराहा स्थित एक मकान के बंद कमरे में 25 से अधिक आदिवासी महिला-पुरुष और बच्चे एकत्र होकर ईसाई प्रार्थना कर रहे हैं। सूचना की पुष्टि होते ही कार्यकर्ता और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। जब बंद कमरे का दरवाजा खुलवाया गया, तो अंदर कई ग्रामीण जमीन पर बैठे मिले।

हर रविवार को होता था आयोजन
पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि यह पाठ हर रविवार को नियमित रूप से आयोजित किया जा रहा था। इस धार्मिक सभा व पाठ का संचालन एक महिला द्वारा कराया जा रहा था। मौके पर मौजूद ग्रामीणों के साथ छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल थे। यह कजानकारी भी सामने आई है कि इस प्रार्थना सभी के माध्यम से आदिवासी महिला पुरुषो के धर्मान्तरण का प्रयास किया जाता था। आदिवासी महिला पुरुषो को यह प्रलोभन दिया जाता था कि ईसाई प्रार्थना करने से उनकी बीमारिया और दुःख दर्द दूर हो जायेंगे। इसी प्रलोभन से उनका धर्मान्तरण करने का प्रयास किया जाता था।
थाने पहुंचे ग्रामीण, जांच जारी
घटना के बाद कार्यकर्ताओं और पुलिस की उपस्थिति में ग्रामीणों को रावटी थाने लाया गया। पुलिस ने मौके से मिले धार्मिक साहित्य को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। रावटी थाना पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की गहनता से पड़ताल की जा रही है, और जांच के आधार पर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 लागू है। इस अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक धर्मांतरण के प्रयास सामने आने पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए लेकिन पुलिस ने प्रकरण दर्ज नहीं करते हुए अभी सिर्फ जाँच करने की बात कही है।
ये है म.प्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 के प्रावधान
मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 (Madhya Pradesh Freedom of Religion Act, 2021) का उद्देश्य प्रलोभन, बल प्रयोग, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव, दबाव अथवा विवाह के माध्यम से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है।
इस कानून में धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति, संस्था और इसमें सहयोग करने वालों के लिए दंड का प्रावधान किया गया है।
- धर्म परिवर्तन के लिए प्रतिबंधित तरीके
अधिनियम के तहत निम्न तरीकों से धर्म परिवर्तन कराना अपराध है:
- बल प्रयोग या धमकी देकर धर्म परिवर्तन कराना।
- धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर धर्म परिवर्तन कराना।
- धन, नौकरी, शिक्षा, मुफ्त इलाज या अन्य लाभ का प्रलोभन देना।
- किसी व्यक्ति पर अनुचित प्रभाव या दबाव डालना।
- विवाह के माध्यम से धर्म परिवर्तन कराना, यदि वह कानून में प्रतिबंधित तरीके से कराया गया हो।
- किसी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाना या षड्यंत्र करना।
- अपराध के लिए सजा का प्रावधान – धारा 5
अपराध का प्रकार सजा न्यूनतम जुर्माना
सामान्य अवैध धर्म परिवर्तन 1 से 5 वर्ष ₹25,000
नाबालिग, महिला या SC/ST व्यक्ति का अवैध धर्म परिवर्तन 2 से 10 वर्ष ₹50,000
विवाह के उद्देश्य से अपना धर्म छिपाना 3 से 10 वर्ष ₹50,000
इसके अतिरिक्त:
- सामूहिक धर्म परिवर्तन (दो से अधिक व्यक्तियों का धर्म परिवर्तन) कराने पर कम से कम 5 वर्ष से 10 वर्ष तक की सजा और कम से कम ₹1 लाख जुर्माने का प्रावधान है।
- दोबारा अपराध करने पर 5 से 10 वर्ष की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।