रतलाम। सायबर अपराधियों द्वारा लोगों को ठगने के नए-नए तरीकों के बढ़ते मामलों को देखते हुए रतलाम पुलिस ने आम नागरिकों को सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस अधीक्षक श्री अमित कुमार के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री राकेश खाखा के मार्गदर्शन में सायबर क्राइम सेल रतलाम द्वारा डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की जा रही धोखाधड़ी को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है।
सायबर क्राइम सेल ने बताया कि भारतीय कानून में “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कोई प्रावधान नहीं है। यह सायबर अपराधियों द्वारा लोगों को डराकर ठगने का नया तरीका है। अपराधी स्वयं को पुलिस, सीबीआई, ईडी या इनकम टैक्स का अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल करते हैं। सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से जुटाई गई व्यक्तिगत जानकारी बताकर लोगों का बनाए विश्वास जीतते हैं और फिर गंभीर अपराध में संलिप्तता का डर दिखाते हैं।
अपराधी यह कहकर डराते हैं कि आपके नाम से ड्रग्स भरा पार्सल पकड़ा गया है, बैंक खाते में अवैध फंड आया है या गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए खुद को पुलिस यूनिफॉर्म में दिखाकर डिजिटल अरेस्ट की बात कहते हैं और कॉल काटने या किसी से संपर्क करने पर कार्रवाई की धमकी देते हैं। जांच के नाम पर बैंक डिटेल्स मांगकर खाते से रुपए निकाल लिए जाते हैं।
एक अन्य तरीके में अपराधी किसी अनजान नंबर से फोन कर यह कहते हैं कि आपका बेटा या बेटी किसी संगीन अपराध में गिरफ्तार हो गया है। उसे छुड़ाने के लिए तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहा जाता है। भरोसा दिलाने के लिए बच्चे का नाम, व्यक्तिगत जानकारी बताई जाती है और मिलती-जुलती आवाज में बात भी कराई जाती है।
सायबर क्राइम सेल ने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से जांच या गिरफ्तारी नहीं करती, न ही ऑनलाइन वारंट भेजे जाते हैं। ऐसे किसी भी कॉल पर घबराने के बजाय कॉल की स्क्रीन रिकॉर्डिंग करें, कोई जानकारी साझा न करें और तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल ष्4ड्ढद्गह्म्ष्ह्म्द्बद्वद्ग.द्दश1.द्बठ्ठ पर शिकायत दर्ज करें। इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना देकर स्क्रीनशॉट व रिकॉर्डिंग के साथ स्थानीय थाने में रिपोर्ट करें। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और इस प्रकार की धोखाधड़ी से स्वयं को तथा अपने परिजनों को सुरक्षित रखें।