रतलाम। जावरा फाटक से सेजावता फंटे तक बन रहे फोरलेन निर्माण के बीच आ रहे पहलवान बाबा की दरगाह के हटाए गए हिस्से को लेकर दरगाह कमेटी हाईकोर्ट पहुंच गई है। हाईकोर्ट ने तहसीलदार कोर्ट के प्रथम आदेश पर रोक लगा दी है।
इसके साथ ही दरगाह कमेटी को 15 दिन में सक्षम अपीलीय कोर्ट में अपील के साथ स्थगन आदेश के आने के निराकरण तक आगे के कार्य को लेकर रोक लगा दी है, लेकिन इसके पहले ही सिविल कोर्ट से मिले आदेश के बाद रतलाम जिला प्रशासन शासकीय भूमि से दरगाह के पास का अतिक्रमण हटा चुका है।
प्रशासन की कार्रवाई से असंतुष्ट है कमेटी
रतलाम के जावरा फाटक से सेजावता फंटे तक बन रहे फोरलेन के बीच में आ रही पहलवान बाबा की दरगाह का बचा हुआ हिस्सा जिला प्रशासन ने बुधवार को हटा दिया है। प्रशासन की टीम ने मजार को बचाते हुए दरगाह के बाहरी हिस्से समेत आसपास के अतिक्रमण को हटा दिया है।
दरगाह कमेटी प्रशासन की कार्रवाई से असंतुष्ट है। दरगाह कमेटी की तरफ से वकीलों ने हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट ने तहसीलदार के 16 अगस्त 24 की कार्रवाई को लेकर जारी आदेश पर रोक लगा दी है। संबंधित पक्ष को सक्षम न्यायालय में अपील करने का 15 दिन का समय दिया है। ऐसे में तहसीलदार के आदेश को यथावत रखने को कहा है। हालांकि इस आदेश के आने के पहले ही प्रशासन सिविल कोर्ट के निर्देश पर अपनी कार्रवाई कर चुका है। दरगाह कमेटी के वकील कोर्ट के सामने एकत्र हुए और अपनी बात रखी।
4.12 किमी का बन रहा फोरलेन
जावरा फाटक से सेजावता फंटे तक 4.12 किमी लंबे फोरलेन का काम चल रहा है। इसमें पहलवान बाबा की दरगाह व मंदिर का भी हिस्सा आ रहा था। प्रशासन ने दोनों पक्षकारों को नोटिस देकर तलब भी किया था, लेकिन मंदिर पक्ष की तरफ से कोई उपस्थित नहीं हुआ था। तब मंदिर की बाउंड्रीवॉल भी प्रशासन ने हटा दी थी।
वहीं दरगाह कमेटी की तरफ से दिए गए जवाब को खारिज कर दिया था। बाद में प्रशासन व समाजजनों व कमेटी के सदस्यों के बीच सहमति बनी। फिर प्रशासन ने अपनी कार्रवाई शुरू की, लेकिन इस बीच दरगाह कमेटी सिविल कोर्ट चली गई और इन्हें स्टे मिल गया था। वहीं, 26 नवंबर को सिविल कोर्ट ने दरगाह कमेटी के स्टे को खारिज कर दिया। अगले दिन 27 नवंबर को प्रशासन ने दरगाह के पास शासकीय भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर चुका है।
बेवजह तोडफ़ोड़ की
दरगाह कमेटी के वकील जहीरुद्दीन ने बताया हाई कोर्ट में याचिका लगाई है। तोडफ़ोड़ पर रोक लगाने की मांग की थी। तहसीलदार के 16 अगस्त के ऑर्डर पर रोक लगा दी है। जितनी भी तोडफ़ोड़ की है, नियमानुसार नहीं की है। सभी दस्तावेज बताए गए थे, लेकिन बिना सुने एकपक्षीय फैसला लिया गया। जो सहमति बनाई थी उसके अनुरूप काम नहीं हुआ। सक्षम न्यायालय में अपील करेंगे।
आदेश का क्रियान्वयन हो चुका है- शासकीय वकील
शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया उच्च न्यायालय ने तहसीलदार के आदेश पर स्थगन दिया है। आदेश अपील के साथ स्थगन आदेश तक यथावत स्थिति रखने का है। जो तहसीलदार का आदेश था उसका धरातल पर क्रियान्वयन हो चुका है। स्टे ऑर्डर का भी सिविल कोर्ट ने निराकरण कर दिया है। ऐसे में दरगाह कमेटी जो आदेश लेकर आए हैं उसका कोई औचित्य नहीं है।
तहसीलदार ऋषभ ठाकुर ने बताया हाई कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। संबंधित पक्ष सक्षम न्यायालय में अपना पक्ष रखे।