सीढिय़ों पर बैठकर लोगों की समस्याएं सुनीं, ज्ञापन नहीं लिया, कलेक्टर महिलाओं से बोलीं- गांव आकर समस्याएं देखूंगी, जमीन कब्जाने का मामला

रतलाम। जिले के आदिवासी क्षेत्रों में खदानों के आवंटन और भूमाफिया द्वारा जमीन कब्जाने के विरोध में सोमवार को आदिवासी समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। हाथों में नारे लिखी तख्तियां लेकर समाज के लोग रैली के रूप में पहुंचे और धरने पर बैठ गए।
प्रदर्शनकारियों ने अपर कलेक्टर को ज्ञापन देने से इनकार कर दिया और कलेक्टर मिशा सिंह को बुलाने की मांग पर अड़ गए। प्रदर्शन के करीब 2.30 घंटे बाद कलेक्टर निकलीं। सीढिय़ों पर बैठी रहीं लेकिन लोगों से ज्ञापन नहीं लिया। उन्होंने महिलाओं से कहा कि आपके गांव आकर समस्याएं देखूंगी।
भूमाफियाओं को जमीन देना बंद करने की मांग
प्रदर्शन में जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशुराम निनामा, आदिवासी परिवार के दिनेश माल सहित कई सरपंच भी शामिल हुए। समाज के लोग एक तीर एक समान, भू माफिया को जमीन देना बंद करे, सरकार देश की चालक है, आदिवासी देश का मालिक है और जो जमीन सरकारी है वो जमीन हमारी है जैसे नारे लिखी तख्तियां हाथों में लेकर पैदल रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।
प्रदर्शन में धभाईपाड़ा, सरवनी खुर्द, चिल्लर जैसे गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। उनका कहना है कि ग्राम सभा की बिना अनुमति के खदानों के लिए एनओसी जारी कर आदिवासियों को उनकी जमीनों से बेदखल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीधे-साधे आदिवासियों को डराया-धमकाया जा रहा है और भू माफिया उनकी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं।
अपर कलेक्टर को ज्ञापन देने से किया इनकार
जब प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठ गए, तो अपर कलेक्टर डॉ. शालिनी श्रीवास्तव और एएसपी राकेश खाखा उनसे ज्ञापन लेने पहुंचे। लेकिन सभी प्रदर्शनकारी कलेक्टर मिशा सिंह को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ गए और उन्हें ज्ञापन देने से मना कर दिया।
ढाई घंटे बाद कलेक्टर चैंबर से बाहर आई
आदिवासी समाज दोपहर 12.30 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। सभी कलेक्टर को ही ज्ञापन देने की मांग पर अड़े रहे। कलेक्टर ने चुनिंदा लोगों को अपने चैंबर में बुलाया। जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशुराम निनामा, दिनेश माल पहुंचे। दोनों को बताया कि जो भी समस्या है गांव में आकर समझी जाएगी। उसके बाद वह बाहर आ गए। लेकिन कलेक्टर बाहर नहीं आई। बाद में कलेक्टर ने आदिवासी समाज की 10 महिलाओं को अपने चैंबर में बुलाया। महिला भी कहती रही कि सभी आप से मिलना चाहते है। तब कलेक्टर ने कहा जो भी समस्या है यहां बताओ।
कलेक्टर ने कहा कि अभी मुझे आए हुए पांच दिन ही हुए है। ग्रामीण क्षेत्र में आकर आपकी समस्या समझूंगी। साथ ही अन्य अधिकारियों को भी समस्या के समाधान की बात कही। कुछ देर में महिलाएं बाहर आ गई। लेकिन कोई भी जाने के लिए तैयार नहीं था।
सीढिय़ों पर बैठी कलेक्टर, ज्ञापन नहीं लिया
आखिरकार दोपहर 3.15 बजे कलेक्टर चैम्बर से बाहर आई। आते से ही कलेक्ट्रेट की सीढिय़ों पर समाजजनों के बीच बैठ गई। फिर सभी की समस्या सुनी। गांव में आकर समस्याओं के निराकरण की बात कही। इस दौरान कलेक्टर ने ज्ञापन भी नहीं लिया। कलेक्टर का कहना था कि जब आपकी बात सुनी है तो गांव में आकर समस्या का हल किया जाएगा।
धोलावाड़ का रोकेंगे पानी
जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशुनिनामा ने बताया कि सैलाना विधानसभा क्षेत्र के धोलावाड़ के आसपास ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को खदानों के नाम पर उनके घरों से बेदखल किया जा रहा है। तीन दिन पहले भी प्रशासन ने कुछ लोगों को घरों से बेदखल किया है। इसी के साथ अन्य समस्याओं को लेकर हम ज्ञापन देने आए थे। कलेक्टर ने दिवाली बाद समस्याओं के हल का आश्वासन दिया है। अगर हमारी मांगे नहीं मानी जाती है तो धोलावाड़ का पानी रोक देंगे।
समस्या सुनी है, गांव में जाएंगे
कलेक्टर मिशा सिंह ने बताया कि ग्रामीणों की समस्या सुनीं है। रतलाम ग्रामीण विधायक भी इन समस्याओं को बता चुके है। सभी से मुलाकात कर आश्वस्त किया। गांव जाकर स्थिति देखेंगे।

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