रॉयल कॉलेज और सम्राट विक्रमादित्य वि.वि. के संयुक्त तत्वावधान में ‘बजट 2026’ पर परिसंवाद संपन्न।

प्रो. डॉ. मेहता ने “क” शब्दों की कशीदाकारी से बुना बजट।

रॉयल इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड एडवांस्ड स्ट्डीज, रतलाम एवं पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंधन संस्थान (सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन) के संयुक्त तत्वावधान में ‘बजट 2026’ पर एक विशेष परिसंवाद का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में निदेशक एवं संकाय अध्यक्ष (प्रबंध संकाय), पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन, प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता उपस्थित रहे।

​प्रो. मेहता ने अपने सारगर्भित विचार व्यक्त करते हुए बजट को एक अनोखे समीकरण के माध्यम से परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि “कैपिटल, कल्चर, कैंसर केयर, क्रेडिट गारंटी, किसान सम्मान निधि और कोरिडोर्स के साथ जब ‘केपेक्स और कौशल’ का समावेश होता है, तो वही इस बजट का वास्तविक ‘क्रिएटिव कंटेंट’ है।” उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत इस केंद्रीय बजट 2026 की पारदर्शिता और दूरदर्शिता को रेखांकित करते हुए कहा कि इसे केवल केंद्रीय बजट न कहकर ‘निर्मल बजट’ कहा जाना चाहिए।

​युवाओं और शिक्षा के क्षेत्र पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि यह बजट ‘युवा शक्ति’ को समर्पित है। कौशल विकास मंत्रालय के बजट में ऐतिहासिक वृद्धि करते हुए इसे ₹9,885 करोड़ किया गया है। इसके तहत ‘पीएम सेतु’ योजना के माध्यम से आईटीआई का आधुनिकीकरण किया जाएगा ताकि युवाओं को सीधे रोजगार मिल सके। छात्राओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देश के प्रत्येक जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाने और रोजगारपरक शिक्षा हेतु 5 नई यूनिवर्सिटी टाउनशिप स्थापित करने की घोषणा एक क्रांतिकारी कदम है।
​ग्रामीण भारत और किसानों के लिए बजट में खजाने का मुँह खोल दिया गया है। प्रो. मेहता ने जानकारी दी कि ग्रामीण रोजगार को सुदृढ़ करने के लिए ‘विकसित भारत ग्रामीण रोजगार गारंटी’ के तहत ₹95,692 करोड़ का विशाल आवंटन किया गया है। वहीं, किसानों की आय बढ़ाने के लिए एआई-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म और बागवानी फसलों के लिए विशेष फंड का प्रावधान है। महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देते हुए ‘लखपति दीदी’ के बाद अब ग्रामीण महिलाओं के लिए ‘शी-मार्ट’ स्थापित किए जाएंगे।
​आम आदमी और करदाताओं को राहत देते हुए उन्होंने बताया कि नए आयकर अधिनियम का 1 अप्रैल 2026 से लागू होना कर प्रणाली को बेहद सरल बना देगा। इसके अलावा, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) रिवाइज करने की समय सीमा को बढ़ाकर 31 मार्च करना, मोटर दुर्घटना क्लेम पर मिलने वाले ब्याज को पूर्णतः टैक्स-फ्री करना और विदेशी शिक्षा व चिकित्सा के लिए टीसीएस को 5% से घटाकर 2% करना, मध्यम वर्ग के जीवन को सुगम बनाने वाले निर्णय हैं।
​इस अवसर पर प्रो. डॉ. अमित शर्मा, प्रो. कहकशां चिश्ती, प्रो. मीनाक्षी गोयल, प्रो. संजय धाकड़, प्रो. यक्षेंद्र हरोड, प्रो. प्रांजल गौतमी और प्रो. गजराज सिंह राठौड़ सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. मृदुला उपाध्याय ने किया और अंत में प्रबंधन विभाग के प्राचार्य FCA डॉ. प्रवीण मंत्री ने मुख्य वक्ता एवं सभी सुधी श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

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