सभी विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर स्थानीय परंपरागत उद्यमों को बढ़ावा दिया जाएगा- मंत्री श्री काश्यप

एमएसएमई मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा है कि विभाग का प्रयास है कि जल्दी ही प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर स्थानीय परंपरागत उद्यमों को बढ़ावा दिया जाएगा।मंत्री श्री काश्यप विधानसभा स्थित समिति कक्ष में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की परामर्शदात्री समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में विधायक श्री ओमप्रकाश सखलेचा,श्री राजेश शुक्ला और श्री सतीश मालवीय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
मंत्री श्री काश्यप ने बैठक को सार्थक बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में निवेश और उद्योगों के लिए सकारात्मक वातावरण बना है और देश विदेश के निवेशक मध्यप्रदेश की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने सदस्यों को आश्वस्त किया कि विभाग बायोटेक्नोलॉजी पार्क के निर्माण के परीक्षण के साथ ही रैंप योजना के तहत उद्यमियों का एक्सपोजर विजिट करवाकर उनकी कार्यकुशलता बढ़ाने का काम करेगी।उन्होंने विभाग का बजट में लगातार वृद्धि के लिए मुख्यमंत्री डॉ यादव का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह वर्ष किसान वर्ष है और विभाग खाद्य प्रसंस्करण आदि उद्योगों की स्थापना में समन्वय करेगा। मंत्री श्री काश्यप कि प्रदेश के शेष 79 विधानसभा क्षेत्रों में औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित करने का कार्य जारी है और इसके पूरा होते ही सभी विधानसभा क्षेत्रों में औद्योगिक क्षेत्र हो जाएंगे।
समिति के सदस्यों ने विभागीय गतिविधियों को सराहा
समिति के सदस्य पूर्व मंत्री और विधायक श्री सखलेचा ने 1700 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को मध्यप्रदेश सरकार द्वारा नवंबर तक की लगभग 750 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन और अनुदान राशि वितरण पर मुख्यमंत्री डॉ यादव और मंत्री श्री काश्यप को बधाई और धन्यवाद दिया। उन्होंने 13 औद्योगिक क्षेत्रों में पिछले एक वर्ष में 1150 औद्योगिक भूखंडों के वितरण को भी ऐतिहासिक बताते हुए विभाग की प्रशंसा की।उन्होंने फेसिलिटेशन काउंसिल के कार्यों की भी प्रशंसा की।
प्रमुख सचिव श्री राघवेंद्र सिंह ने बताया कि इस वर्ष 313 करोड़ रुपए की लागत से 13 नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया जा रहा है और यहां 305 हेक्टेयर क्षेत्र में 1622 भूखंड उपलब्ध होंगे।उन्होंने बताया कि इस वर्ष 50 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में 7 नए क्लस्टर भी बनाए गए हैं जिनमें 399 इकाइयां स्थापित होना और 8850 रोजगार उपलब्ध होना प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि जनवरी 2026 तक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या में 29 और महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप की संख्या में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।ये स्टार्टअप अब क्रमशः 6753 और 3236 हो गये है।
प्रमुख सचिव श्री सिंह  ने गत बैठक के पालन प्रतिवेदन का प्रस्तुतीकरण किया। समिति ने प्रतिवेदन की पुष्टि की।उन्होंने बताया कि 1700 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को ₹750.86 करोड़ की प्रोत्साहन सहायता राशि का वितरण, 4800 से अधिक पॉवरलूम इकाइयों को ₹18 करोड़ की विद्युत रियायत, मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना अंतर्गत 9095 हितग्राहियों को ₹626.85 करोड़ की ऋण राशि बैंकों के माध्यम से उपलब्ध कराकर स्वरोजगार से जोड़ा गया। स्टार्टअप को भी मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना से लाभ दिए जाने की शुरुआत हुई है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम अंतर्गत 943 हितग्राहियों को ₹46.42 करोड़ मार्जिन का वितरण किया गया।और 257 स्टार्टअप को विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत ₹1.59 करोड़ की वित्तीय सहायता एवं EIR अनुदान अंतर्गत 222 स्टार्टअप्स को 12 माह की अवधि के लिये रु. 2.6 करोड़ के लाभ स्वीकृत किया गया है। इस दौरान प्रदेश में रैंप गतिविधियों की जानकारी दी गई तथा और 21 जी आई टैग के लिए किए गए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के संबंध में भी बताया गया।

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