
रतलाम, 11 अगस्त ( News SSR )। समाज में अमूमन बुजुर्ग माता-पिता को बच्चों द्वारा प्रताड़ित किए जाने और वृद्धाश्रम भेजने के मामले अक्सर सामने आते हैं, लेकिन मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय की जनसुनवाई में इसका उलट एक बेहद अनोखा और हैरान करने वाला मामला सामने आया। यहाँ एक युवक ने अपनी ही माँ और बहन की प्रताड़ना से परेशान होकर पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा और न्याय की गुहार लगाई है।
ग्राम बिबडोड निवासी प्रार्थी अरुण (पिता स्व. गणपत) ने पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में बताया कि उनके पिता का स्वर्गवास हो चुका है। प्रार्थी के अनुसार, उसने अपने पिता के जीवनकाल में मजदूरी कर और ससुराल पक्ष से सहायता लेकर एक मकान बनवाया था, जहाँ वर्तमान में उसकी माँ (शारदा बाई) और बहन (ऊषा) निवास कर रहे हैं, जबकि पिता के देहांत के पश्चात उन्हें घर से निकाल दिया गया है।
मकान निर्माण रोकने और झूठी शिकायत का आरोप
युवक ने आवेदन में आरोप लगाया है कि मजदूरी से लौटने पर माँ और बहन द्वारा उसे व उसकी पत्नी को गाली-गलौज दी जाती है, समय पर खाना नहीं दिया जाता तथा बच्चों के साथ भी क्रूरतापूर्ण व्यवहार किया जाता है। विरोध करने पर माँ व बहन ने उसे, उसकी पत्नी और बच्चों को घर से बाहर निकाल दिया और जमीन व लीज के पैसों की माँग करते हुए साथ रखने से इंकार कर दिया।
प्रार्थी ने जैसे-तैसे कुछ रुपए एकत्र कर और लोन लेकर ग्राम बिबडोड से डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित अपने स्वर्गीय पिता के नाम दर्ज प्लॉट पर मकान बनाना शुरू किया, तो प्रतिपार्टी ने थाने में झूठी रिपोर्ट दर्ज करवाकर उसका निर्माण कार्य रुकवा दिया। निर्माण रुकने और मटेरियल खराब होने के कारण इस वर्षाकाल में उसका पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे और दर-दर भटकने को मजबूर है, जबकि उसने इसके लिए उधार रुपए ले रखे हैं और पैड़ी (लेंटर/छत) भी भर दी थी।
प्रार्थी अरुण ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि उसे उसके पिता के प्लॉट पर मकान निर्माण करने की अनुमति दिलाई जाए तथा प्रतिार्थियों (माँ और बहन) को समझाइश देकर पाबंद किया जाए कि वे उसे व उसके परिवार को परेशान न करें और झूठी शिकायतें दर्ज न करवाएँ।