
रतलाम। ( News SSR )संत तप त्याग तपस्या स्वर्ण धरा की नींव हैं निर्वाणी अखाड़ा पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर परम पूज्य स्वामी श्री श्री 1008 विशोकानंद भारती जी महाराज, अखण्ड ज्ञान आश्रम स्वामी देवस्वरुपानंद जी महाराज, अपने अनमोल वचनों की शब्दावली द्वारा निरूद्ध बंदियों ने सहजता से जीवन की सार गंभीरता को जाना हम परमात्मा से अपील करें कष्टों में कटौती होगी संसार रूपी कारागार से बाहर निकलना ही संस्कार हैं अपनी भूल का सुधार ही समाधान हैं यह बात सर्किल जेल स्थित निरुद्ध बंदियों को स्वामी जी द्वारा कहीं गई।

जेल अधीक्षक लक्ष्मण सिंह भदौरिया, उप जेल अधीक्षक ब्रजेश मकवाने की मौजूदगी में सत्संग किया गया।

सर्वप्रथम दीप प्रज्वलन के पश्चात अतिथि सम्मान सतकार कर प्रवचन द्वारा जागरूक किया गया हम बाहरी परतंत्रता से दूर रहें हम हर पल ईश्वरीय कर्म कर सदैव स्वतंत्र रहें इस दुनिया रुपी कारागार में मेरी कब रिहाई होगी वाक्यांशों में ही श्रृष्टि का सार छुपा हैं वाघेला गौ सेवा जीव दया समिति दिनेश वाघेला समाजसेवी अनिल झालानी के प्रयासों से आयोजित किया गया। मुख्य रूप से जनशक्ति के महेश खंडेलवाल, पतंजलि संस्थान विशाल कुमार वर्मा, ब्रह्मा कुमारी राजू पोरवाल, वाघेला गोसेवा जीवदया के दिनेश वाघेला, बाबूलाल सिसोदिया, महावीर शक्तावत, डिजिटल रामायण के मनोज जायसवाल, अन्य सेवादार उपस्थित रहें संचालन ब्रजेश मकवाने आभार लक्ष्मण सिंह भदौरिया द्वारा किया गया