भगवान कृष्ण की गोपियों संग प्रेम लीला भक्ति और समर्पण का प्रतीक : स्वामी विशोकानंद जी भारती

गोपियों ने कहा—संसार के सभी संबंधों के परम आधार हैं श्रीकृष्ण, हम पूर्ण रूप से उनके चरणों में समर्पित

रतलाम, 10 सितंबर 2026 (गुरुवार)। ( News SSR )स्वामी ज्ञानानंद मार्ग, सैलाना बस स्टैंड स्थित श्री अखंड ज्ञान आश्रम में आयोजित दिव्य चातुर्मास महोत्सव के अंतर्गत गुरुवार को निर्वाणी अखाड़ा पीठाधीश्वर, आचार्य महामंडलेश्वर परम पूज्य स्वामी श्री श्री 1008 विशोकानंद जी भारती के सानिध्य में प्रातःकाल कठोपनिषद का स्वाध्याय तथा सायंकाल श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हुआ। कथा एवं प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।

प्रवचन में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद जी भारती ने भगवान श्रीकृष्ण की गोपियों के साथ प्रेम लीला का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों का प्रेम सांसारिक वासना से रहित, शुद्ध भक्ति, श्रद्धा और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गोपियों का कृष्ण के प्रति प्रेम किसी सांसारिक आकर्षण का नहीं, बल्कि परमात्मा के प्रति आत्मा के समर्पण का भाव है।

कथा प्रसंग के दौरान उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के बांसुरी वादन की मधुर धुन सुनकर गोपियां उनके पास पहुंचीं। भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे पूछा कि वे यहां क्यों आई हैं। गोपियों ने कहा कि बांसुरी की धुन उन्हें यहां खींच लाई है। इस पर भगवान ने उन्हें गृहस्थ धर्म और परिवार के बड़ों की आज्ञा का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि घर से बाहर निकलते समय परिवार के बड़े, पिता, भाई अथवा पति की अनुमति और आज्ञा का पालन करना आवश्यक है।

कथा में गोपियों और भगवान श्रीकृष्ण के बीच हुए संवाद के माध्यम से यह भी बताया गया कि यदि घर में पति उपस्थित न हों तो उनके चित्र का पूजन कर भोग अर्पित किया जा सकता है। इसी प्रसंग में जब गोपी ने पूछा कि यदि उसी समय पति घर के बाहर से आ जाएं तो पहले किसकी पूजा की जाए, तब भगवान श्रीकृष्ण ने समझाया कि जो द्वार पर उपस्थित है, उसका प्रथम सम्मान और पूजन किया जाना चाहिए।

इसके बाद गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपने पूर्ण समर्पण का भाव व्यक्त करते हुए कहा कि संसार में दिखाई देने वाले सभी पति-पत्नी संबंधों के मूल आधार स्वयं परमपिता परमेश्वर हैं। हमारे लिए आप ही परम पति स्वरूप हैं, इसलिए हम आपके पास आई हैं। गोपियों ने भगवान से प्रार्थना करते हुए कहा कि जिस प्रकार वे युगों से अपने भक्तों का संरक्षण करते आए हैं, उसी प्रकार उनका भी संरक्षण करें। उन्होंने अपने पूर्ण समर्पण का भाव व्यक्त करते हुए कहा कि अब हमारा अस्तित्व और हमारा भजन भी आपको ही समर्पित है।

कथा के अंत में आरती का गायन स्वामी गोशरणानंद जी सरस्वती द्वारा किया गया । आरती के पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर आश्रम के संतगण सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु एवं भक्तजन उपस्थित रहे।

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