
आलोट। 25सितम्बर ( News SSR ) कल से सनातन संस्कृति के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण पखवाड़े—श्राद्धपक्ष (पितृपक्ष) का शुभारंभ हो गया है। अगले 16 दिनों तक देश भर में लोग अपने पूर्वजों, पितरों और दिवंगत परिजनों को याद कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
इस दौरान श्रद्धा, संयम और सेवाभाव के साथ पितरों की मोक्ष प्राप्ति और उनकी तृप्ति के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे।इस पखवाड़े के मुख्य बिंदु और परंपराएंतर्पण और पिंडदान: इन 16 दिनों में लोग अपने पूर्वजों की तिथि के अनुसार नदी तटों, मंदिरों या अपने घरों में पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोजन का आयोजन करते हैं।
इस अवधि में जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल और गोदान आदि का विशेष पुण्य माना गया है। मान्यता है कि इससे पितृगण प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। पितृपक्ष केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपनी जड़ों, पारिवारिक इतिहास और परंपराओं से जुड़ने का एक बेहतरीन अवसर है। इससे परिवार में आपसी सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।इस दौरान गाय, कौए, कुत्ते और चींटियों को भोजन (ग्रास) निकालने की परंपरा है, जो प्रकृति और जीवों के प्रति हमारी कृतज्ञता को दर्शाती है।यह पक्ष हमें यह सिखाता है कि जो लोग इस संसार में शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, उनके संस्कार और आशीर्वाद आज भी हमारे साथ हैं। उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।