
पिपलौदा। ( News SSR ) मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा पर स्थित माँ महामाया भादवा माता का सुप्रसिद्ध मंदिर केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्वभर के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यह वह पावन धाम है जहाँ विज्ञान की सीमाएँ समाप्त हो जाती हैं और श्रद्धा, विश्वास तथा माँ की कृपा अपना चमत्कार दिखाती है। विशेष रूप से लकवा (पैरालिसिस) सहित अनेक गंभीर रोगों से पीड़ित लोग यहाँ आकर माँ के चरणों में अपनी अर्जी लगाते हैं और मानसिक शक्ति एवं नई आशा प्राप्त करते हैं।
मुझे पिछले लगभग चार दशकों से माँ भादवा के दर्शन का सौभाग्य मिलता रहा है। हाल ही में लगातार दो रविवार इस पवित्र धाम पर जाने का अवसर मिला। माँ के प्रति श्रद्धा पहले की तरह अटूट है, लेकिन वहाँ की व्यवस्थाओं को देखकर मन अत्यंत व्यथित हुआ।
यह अत्यंत दुःखद है कि इतनी महान आस्था का केंद्र होने के बावजूद मंदिर परिसर में अनेक मूलभूत सुविधाओं का अभाव दिखाई देता है। कई स्थानों पर गंदगी फैली हुई है। स्वच्छता की समुचित व्यवस्था नहीं है। श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं है। दर्शन के लिए आने वाले हजारों लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है तथा सुरक्षा व्यवस्था भी अपेक्षित स्तर की नहीं दिखाई देती। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु अनेक परेशानियों के बीच माँ के दर्शन करने को विवश हैं।
विशेष चिंता का विषय यह है कि यहाँ बड़ी संख्या में लकवा एवं अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज अपने परिजनों के साथ आते हैं। ऐसे मरीजों के लिए ऊँची सीढ़ियाँ चढ़ना अत्यंत कष्टदायक होता है। इसलिए मंदिर परिसर को दिव्यांगजन एवं व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के अनुकूल बनाया जाना चाहिए। एक ऐसा रैंप बनाया जाए जिससे मरीज आसानी से ऊपर जाकर माँ के दर्शन कर सकें और सुरक्षित रूप से वापस नीचे आ सकें।
एक अन्य महत्वपूर्ण विषय मंदिर परिसर की संरचना है। श्रद्धालुओं के विश्राम स्थल एवं अन्य स्थानों पर अत्यधिक संख्या में सीमेंट-कंक्रीट के बड़े-बड़े पिलर बने हुए हैं, जिससे भीड़ के संचालन में कठिनाई होती है। आज भारत में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक उपलब्ध है। इसलिए भविष्य में मंदिर के विस्तार एवं सौंदर्यीकरण के दौरान ऐसी संरचना बनाई जाए जिसमें कम पिलरों के साथ अधिक खुला एवं सुरक्षित स्थान उपलब्ध हो, ताकि लाखों श्रद्धालु सहज रूप से दर्शन कर सकें।
मैं मंदिर समिति, स्थानीय नगर प्रशासन, जिला प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों से विनम्र आग्रह करता हूँ कि माँ भादवा की महिमा के अनुरूप इस पवित्र धाम का व्यापक विकास किया जाए। स्वच्छता, पेयजल, सुरक्षा, दिव्यांगजन-अनुकूल सुविधाएँ, सुव्यवस्थित प्रवेश एवं निकास मार्ग तथा आधुनिक आधारभूत व्यवस्थाएँ शीघ्र विकसित की जाएँ।
यह मंदिर केवल हिंदू समाज की आस्था का केंद्र नहीं है। यहाँ विभिन्न धर्मों के लोग, विशेष रूप से मुस्लिम भाई-बहन भी अपने लकवाग्रस्त एवं गंभीर रोगियों को लेकर श्रद्धापूर्वक आते हैं और माँ के दरबार में अपनी हाजिरी लगाते हैं। यही इस पवित्र धाम की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह मानवता, विश्वास और आस्था का प्रतीक है।
आइए, हम सब मिलकर प्रयास करें कि माँ भादवा का यह दिव्य धाम अपनी आध्यात्मिक महिमा के साथ-साथ स्वच्छता, सुव्यवस्था और आधुनिक सुविधाओं का भी आदर्श बने।लेखक: गणेश मालवीय, पिपलोदा (जिला रतलाम)