
रतलाम।( News SSR )रतलाम जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर स्थित पलसोड़ा गांव में 250 साल पुराना सांवलिया सेठ का पावन दरबार आज अटूट आस्था और अभूतपूर्व आर्थिक समृद्धि का केंद्र बन चुका है। दशकों तक कच्चे मकान में विराजमान रहने वाले सांवलिया सेठ जैसे ही अपने भव्य पक्के मंदिर में विराजे, इस गांव की किस्मत में ऐसा बदलाव आया जिसकी मिसाल मिलना मुश्किल है।

ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर के पक्के निर्माण के साथ ही गांव में चमत्कारी आर्थिक बदलाव देखने को मिला। मंदिर बनते ही गांव में दो बड़ी कॉलोनियों का निर्माण शुरू हुआ, जिससे जमीनों के भाव अचानक 4 गुना तक बढ़ गए। आसपास के अन्य गांवों में अधिकांश किसानों की जमीनें बहुत पहले बिक चुकी थीं, लेकिन पलसोड़ा के किसानों की जमीनें सांवलिया सेठ की कृपा से बची रहीं। आज जब जमीनों की कीमतें आसमान छू रही हैं, तब गांव का लगभग हर किसान आर्थिक रूप से संपन्न और करोड़पति बन चुका है।
भविष्य का ‘महा-धाम’: धार्मिक पर्यटन और कॉरिडोर से बदलेगी तस्वीर
पलसोड़ा गांव आने वाले समय में देश के शीर्ष देवस्थानों में शुमार होने जा रहा है। आने वाले समय में देश-विदेश के बड़े उद्योगपति सांवलिया सेठ को अपना ‘बिजनेस पार्टनर’ बनाकर लाभ का एक अंश मंदिर व जनसेवा में समर्पित करेंगे। हर एकादशी पर खाटू श्याम भक्तों की विशाल पदयात्रा और लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए इस पूरे मार्ग को एक भव्य धार्मिक कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्षेत्र में विश्वस्तरीय सड़कें, धर्मशालाएं और व्यापारिक परिसर तैयार होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
कच्चे दरबार से भव्य मंदिर तक का सफर और गांव की यह अभूतपूर्व क्रांति इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि पलसोड़ा का यह सांवलिया सेठ दरबार अत्यंत जागृत है, जो आने वाले दिनों में देश का अगला बड़ा ‘महा-धाम’ बनने की ओर तेज़ी से अग्रसर है।