
रतलाम,14 जुलाई( News SSR )। जिले के विकासखण्ड जावरा के ग्राम रूपनगर और रिछाचाँदा के ग्रामीण मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीणों ने जिलाधीश (कलेक्टर) को ज्ञापन सौंपकर शासकीय प्राथमिक विद्यालय रूपनगर के लोकप्रिय शिक्षक श्री बद्रीलाल राठौड़ का स्थानांतरण रोकने या उन्हें इसी स्कूल में अटैच करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक के ट्रांसफर होने के बाद पिछले 9 दिनों से स्कूल का एक भी बच्चा पढ़ाई करने स्कूल नहीं गया है।
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ का प्रशासनिक स्थानांतरण शासकीय प्राथमिक विद्यालय सेमलिया (विकासखण्ड पिपलौदा) कर दिया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, शिक्षक राठौड़ बेहद कर्मठ और ईमानदार हैं। उन्होंने अपने निजी खर्च से रूपनगर के इस सरकारी स्कूल में स्टील बाउंड्रीवॉल, झूले, फिसलपट्टी, वॉटर कूलर, 50 इंच का कलर टीवी, डायनिंग टेबल, पंखे और फर्श पर कालीन जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। इसके अलावा, वे छात्रों को स्कूल बैग, कॉपियां, स्टेशनरी और ज्योमेट्री बॉक्स जैसी चीजें भी अपनी जेब से देते आ रहे हैं।
प्रदेश का पहला ‘समस्यामुक्त’ और देश का पहला ‘बैगलेस’ स्कूल
ग्रामीणों ने दावा किया कि शिक्षक के प्रयासों के कारण यह स्कूल प्रदेश का पहला समस्यामुक्त और देश का पहला ‘बैगलेस’ स्कूल बना है। शिक्षक ने बच्चों की बेहतर पढ़ाई के लिए अपनी जेब से वेतन देकर 3 अतिरिक्त प्राइवेट शिक्षकों की व्यवस्था भी कर रखी थी। शिक्षक के इस समर्पण का ही परिणाम है कि आज ग्राम रूपनगर में एक भी प्राइवेट स्कूल नहीं है और न ही गांव का कोई बच्चा किसी प्राइवेट स्कूल में पढ़ने जाता है। बल्कि, बाहरी गांवों के भी 25 बच्चे यहाँ पढ़ने आते हैं।
अटैचमेंट करने की लगाई गुहार
ग्रामीणों (समस्त ग्रामवासी ग्राम रूपनगर एवं रिछाचाँदा) का कहना है कि शिक्षक का ट्रांसफर होने से बच्चों और पूरे गांव में भारी निराशा है। उन्होंने जिलाधीश से मानवीय आधार पर और छात्रों के भविष्य को देखते हुए शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ का अटैचमेंट दोबारा शासकीय प्राथमिक विद्यालय रूपनगर में ही करने की मांग की है, ताकि बच्चों की रुकी हुई पढ़ाई फिर से शुरू हो सके।