
100वें एकादशी संकीर्तन में श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों पर किया नृत्य, आरती के बाद हुआ प्रसादी वितरण

रतलाम 23अगस्त ( News SSR )गीता मंदिर में एकादशी के अवसर पर आयोजित होने वाले नियमित एकादशी संकीर्तन की श्रृंखला ने रविवार को 100वें आयोजन के साथ विशेष मुकाम हासिल किया। इस अवसर पर दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अनूठा वातावरण रहा। 100वें संकीर्तन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

इस विशेष अवसर पर प्रसिद्ध भजन गायक पं. गोपाल कृष्ण शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण के सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने “तुमको हमारी सौगंध, तुमको मेरी दुहाई, रखना तुम्हारी कैद में, देना ना अब रिहाई” तथा “हम आ गए हैं दर पे, अब हश्र जो भी होवे, दामन तुम्हारा थाम के, तुमको हमारी सौगंध” जैसे भक्ति गीत प्रस्तुत किए। भजनों पर महिलाओं सहित श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से नृत्य किया।
100वें एकादशी संकीर्तन के अवसर पर गीता मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण एवं अर्जुन की प्रतिमाओं सहित पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों से सजाया गया था। फूलों की सजावट और भजनों की मधुर स्वर-लहरियों से मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय नजर आया।

चार वर्षों से निरंतर चल रही संकीर्तन यात्रा
इस अवसर पर वीरेंद्र वाफगांवकर ने बताया कि एकादशी संकीर्तन की यह यात्रा पिछले चार वर्षों से निरंतर श्रद्धा और भक्ति के साथ जारी है और अब 100वें आयोजन तक पहुंची है। उन्होंने इस धार्मिक आयोजन की सफलता के लिए सभी श्रद्धालुओं एवं आयोजकों को बधाई दी।
एकादशी संकीर्तन का आयोजन हरिश ठक्कर एवं ठक्कर परिवार (जयराम स्वीट्स) द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में भगवान की आरती की गई, जिसके पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई।

इस अवसर पर नीला ठक्कर, प्रतिमा ठक्कर, परिता ठक्कर, पूजा ठक्कर, हिमांशी ठक्कर, शनाया ठक्कर, दीपाली ठक्कर, बेला ठक्कर, कायरा, सुमन सिंघल, ज्योति अग्रवाल, ललिता सोमानी, शीला खड़ेलवाल, रामा शर्मा, दीपक पुरोहित, संजय व्यास, संदीप व्यास, रेणु व्यास, नवीन व्यास, डॉ. पी.के. पुरोहित, किरण व्यास, प्रेमलता दवे, गोवर्धन रेंडा, संगीता गुणावत, सरोज ओझा सहित बड़ी संख्या में भक्त एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अगला एकादशी संकीर्तन 7 सितंबर को
आयोजकों ने बताया कि एकादशी संकीर्तन की आगामी कड़ी 7 सितंबर को आयोजित की जाएगी। श्रद्धालुओं से आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का लाभ लेने का आग्रह किया गया।