दूसरे के कंधों पर चढ़कर शिखर नहीं पाया जा सकता – अदिति मिश्रा

रतलाम।( News SSR ) शासकीय कन्या स्नातकोतर महाविद्यालय में ‘हिंदी दिवस’ के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। हिंदी विभाग भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ, करिअर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ एवं दिवस आयोजन समिति के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय में आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में पत्रकार एवं लेखिका अदिति मिश्रा मौजूद रहीं। अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. मंगलेश्वरी जोशी ने की। इसके साथ ही केरियर प्रकोष्ठ जिला प्रभारी डॉ. माणिक डांगे के साथ ही हिन्दी विभाग विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता श्रीमाल मंचासीन रहे।


अतिथियों का स्वागत डा. सरोज रखरे, डॉ. स्वर्णलता नागर एवं डॉ. वन्दना नामदेव ने किया। अतिथि परिचय और विषय प्रवर्तन करते हुए हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीमाल ने कहा कि हिन्दी भाषा अपने लचीलेपन की विशेषता के कारण ही सबको समाहित करते हुए आज तक जीवन्त है और आगे भी रहेगी। कठिन से सरलता की ओर अग्रसर होने के कारण ही यह जन-जन के हृदय में निवास करती है। यह बहतेह नीर की तरह निरन्तर गतिमान है।
जानकारियों की अधिकता, महत्व को करती है कम
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं मुख्यवक्ता लेखिका एवं पत्रकार अदिति मिश्रा ने बड़ी सहज, सरल और आकर्षक शैली से पूरे सदन को मंत्र मुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि आज जानकारियों की कमी नहीं है, लेकिन हम सही जानकारियों का मूल्यांकन करें। जो सहज प्राप्त हो जाता है हम उसका महत्व नहीं जानते, यही आज हमारी भाषा के साथ भी हो रहा है। हिंदी केवल भाषा ही नहीं, एक विचार है अत: हमारी संस्कृति या स्वयं का भाव भी अपनी भाषा के सृजन से ही संभव है। अदिति मिश्रा ने महर्षि पाणिनी से लेकर आज तक के इतिहास को मनोरंजक एवं सरल भाषा में समझाया। उन्होंने कहा कि हिंदी 70 लाख साल पहले की भावनाओं को आज तक समेटने वाली भाषा है, यह आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें भावों से ह्रदय तक पहुँचने की अद्भुत क्षमता है। हिंदी के क्षेत्र में अवसरों की कमी नहीं है, यदि हम हिंदी को आत्मसात करें तो रोजगार स्वयमेव मिलते चले जाएंगे। अन्य भाषाओं की अपेक्षा अपनी भाषा को जीवित रखना युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी है, क्योंकि दूसरे के कंधों पर चढ़कर शिखर को नहीं पाया जा सकता।
यदि तुम न होती तो….
स्वामी विवेकानंद कॅरियर प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. माणिक डांगे ने हिंदी को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी तथा उन्होंने बताया कि 14 सितम्बर को ही हिंदी दिवस दिवस क्यों मनाया जाता है । कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मंगलेश्वरी जोशी ने अपनी लिखी पंक्तियों के माध्यम से हिंदी के लिए कहा- ‘यदि तुम न होती तो’ आज मेरा व्यक्तित्व नहीं होता। मैं हिंदी की ऋणी हूँ। हिंदी के बिना सारे विषय अधूरे है। आप हिंदी की नींव को घर और मजबूत कीजिये। प्राध्यापको सहित हिंदी साहित्य विषय की धात्राएँ बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं। संचालन प्राध्यापक डॉ. सरोज खरे ने करते हुए स्वरचित कविता को प्रस्तुत किया। आभार डॉ. स्वर्णलता नागर ने व्यक्त किया।

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