पंचकेदार की दुर्गम यात्रा पर रवाना हुआ रतलाम-मंदसौर के चार सदस्यों का दल

किन्नौर कैलाश यात्रा पर प्रतिबंध के बाद बना पंचकेदार का योग, ‘इ खबर टुडे’ की टीम ने दी विदाई

रतलाम, 15 जुलाई। ( News SSR )हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी रतलाम और मंदसौर के साहसी यात्रियों का दल अपनी धार्मिक व रोमांचक यात्रा के लिए बुधवार सुबह रवाना हो गया। इस दल में ‘इ खबर टुडे डॉट कॉम’ के संचालक व संपादक तुषार कोठारी, अधिवक्ता दशरथ पाटीदार और अधिवक्ता प्रकाश पवार मंदसौर के संपादक आशुतोष नवाल शामिल हैं।

​दल के चौथे सदस्य, मंदसौर के ‘गुरु एक्सप्रेस’ के संपादक आशुतोष नवाल, सीतामऊ के समीप से गुजरने वाले एटलेन एक्सप्रेसवे से इस यात्रा में सहभागी बने। यात्रा पर रवाना होने से पूर्व रतलाम में ‘इ खबर टुडे’ की टीम एवं मित्र उदित अग्रवाल, हेमंत भट्ट, अधिवक्ता संतोष त्रिपाठी, नीरज सक्सेना,मनीष शर्मा, राजेंद्र सिंह चौहान, किशोर सिलावट, संतोष घोड़ेटा, विवेक राठौड़, सचिन सोनी और सीतामऊ में कमलेश शर्मा, राजपाल सिंह परिहार, यशपाल सिंह ठाकुर, दीपक शर्मा आदि ने पुष्पहार पहनाकर और शुभकामनाएं देकर दल का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें मंगलमय यात्रा के लिए विदा किया।

प्राकृतिक आपदा के कारण बदला रूट: अब करेंगे पंचकेदार की यात्रा
​यात्रियों ने बताया कि इस वर्ष उनका गंतव्य हिमाचल प्रदेश में स्थित ‘किन्नौर कैलाश’ था। किंतु वहां लगातार हो रही प्राकृतिक आपदाओं और भूस्खलन की स्थिति को देखते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने फिलहाल इस यात्रा पर प्रतिबंध लगा रखा है। इस कारण दल ने उत्तराखंड के दुर्गम व पवित्र पंचकेदार की यात्रा पर जाने का निर्णय लिया।

​यात्री दल पूर्व में उत्तराखंड के मुख्य केदारनाथ धाम की यात्रा कर चुका है, इसलिए इस बार वे पंचकेदार में शामिल अन्य चार अति-दुर्गम और आलौकिक धामों—तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मध्यमहेश्वर और कल्पेश्वर के दर्शन करेंगे।

​90 किलोमीटर का पैदल सफर और दुर्गम पहाड़ियों का रोमांच
​लगभग 12 से 15 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में यह दल करीब 90 किलोमीटर का अत्यंत कठिन और दुर्गम पैदल ट्रैक पूरा करेगा। दल के सदस्य पूर्व में भी कई कठिन और साहसिक यात्राएं सफलतापूर्वक पूरी कर चुके हैं, जिनमें ​कैलाश मानसरोवर यात्रा (आशुतोष नवाल और तुषार कोठारी द्वारा पूर्ण), ​श्रीखंड महादेव और मणिमहेश यात्रा, ​आदि कैलाश, ​गोमुख और सतोपंत ट्रैक शामिल हैं।

“किन्नौर कैलाश जाने की इच्छा इस वर्ष अधूरी रह गई, जिसे अगले वर्ष पूरा करने का प्रयास करेंगे। लेकिन पंचकेदार के इन चार पवित्र धामों की यात्रा भी बेहद रोमांचक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करने वाली होगी।”
तुषार कोठारी, संपादक (इ खबर टुडे)

​इन चार केदार धामों के दर्शन करेगा दल
​पर्वतीय क्षेत्रों और घने जंगलों के बीच स्थित इन चारों धामों की अपनी विशेष धार्मिक मान्यताएं हैं। तुंगनाथ (Tungnath) : शिवजी की भुजाओं (बांहों) का भाग। 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है।

रुद्रनाथ (Rudranath): शिवजी के मुख (चेहरे) का भाग। यह प्राकृतिक गुफा के रूप में 2,286 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यहाँ का ट्रेक काफी घना और दुर्गम है।

मध्यमहेश्वर (Madhyamaheshwar): शिवजी की नाभि का भाग। 3,490 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर के आसपास की घाटियाँ बेहद खूबसूरत हैं।

कल्पेश्वर (Kalpeshwar): शिवजी की जटाओं (केश) का भाग। 2,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जो साल भर खुला रहता है।

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