जैन समाज में पर्युषण पर्व का समापन, श्रद्धालु करेंगे वर्षभर की भूलों का प्रायश्चित

आलोट 14सितम्बर( News SSR ) पर्युषण पर्व के समापन अवसर पर जैन समाज की ओर से कल मंगलवार को संवत्सरी प्रतिक्रमण किया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालु वर्षभर में जाने-अनजाने हुई भूलों और गलतियों का आत्मावलोकन करते हुए प्रायश्चित करेंगे। संवत्सरी को जैन धर्म में आत्मशुद्धि, संयम और क्षमाभाव का विशेष पर्व माना गया है।
मंदिरों एवं उपाश्रयों में दिनभर धार्मिक आयोजन होंगे। साधु-साध्वियों के सान्निध्य में श्रद्धालु सामूहिक रूप से संवत्सरी प्रतिक्रमण करेंगे। प्रतिक्रमण के दौरान आत्मचिंतन के साथ मन, वचन और कर्म से हुई त्रुटियों के लिए क्षमा याचना की जाएगी।
‘मिच्छामि दुक्कडम्’ से मांगेंगे क्षमा
संवत्सरी पर्व पर जैन समाज के लोग एक-दूसरे से क्षमा मांगते हुए ‘मिच्छामि दुक्कडम्’ कहते हैं। इसका भाव है कि मन, वचन या कर्म से किसी को दुख पहुंचा हो तो उसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं। यह पर्व आपसी वैमनस्य भुलाकर प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देता है।
तप, त्याग और संयम का संदेश
संवत्सरी के अवसर पर अनेक श्रद्धालु उपवास एवं तपस्या करते हैं। धार्मिक आयोजनों के साथ आत्मचिंतन और संयम को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया जाता है। जैन समाज में संवत्सरी को आत्मनिरीक्षण और जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा देने वाला महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।
क्षमाभाव के साथ पर्व का समापन
संवत्सरी प्रतिक्रमण के माध्यम से श्रद्धालु अपने भीतर झांकते हुए बीती गलतियों से सीख लेने और भविष्य में संयमित जीवन जीने का संकल्प करेंगे। क्षमा, मैत्री और आत्मशुद्धि के संदेश के साथ पर्युषण पर्व का समापन होगा।