जन्मशताब्दी वर्ष के अंतर्गत सुबह 6 से सायं 6 बजे तक हुआ अखंड गायत्री मंत्र जप
सांध्यकालीन सत्र में दीपयज्ञ के माध्यम से माताजी की प्रेरणाओं को किया स्मरण

रतलाम। 20सितंबर ( News SSR ) अखिल विश्व गायत्री परिवार की अधिष्ठात्री एवं संस्थापिका एवं परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की परम सहयोगिनी एवं सजल श्रद्धा की प्रतिमूर्ति वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जन्म की शताब्दी वर्षगाँठ 20 सितंबर को रतलाम के शंकरगढ़ स्थित गायत्री शक्तिपीठ पर श्रद्धा एवं भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया। उल्लेखनीय है कि अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा माताजी के जन्मशताब्दी वर्ष के अंतर्गत विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहें है। जिसमें कन्या कौशल शिविर, महिला जागरण शिविर, गृहे गृहे गायत्री यज्ञ, पंच कुण्डीय यज्ञ श्रृंखला, युवा सम्मेलन इत्यादि जैसे कार्यक्रम किये जा रहें है। इसी वर्ष वंदनीया माताजी पर भारत सरकार द्वारा डाक टिकिट विमोचन की भी योजना प्रस्तावित है।

गायत्री शक्तिपीठ शंकरगढ़ पर सम्पन्न हुए कार्यक्रम के अंतर्गत प्रातः 6 बजे से शाम 6 बजे तक अखंड गायत्री मंत्र जप का साधनात्मक आयोजन किया गया। इसमें गायत्री परिवार रतलाम के सभी परिजनों, युवा प्रकोष्ठ, महिला मंडल, प्रज्ञा मंडल, जिला समन्वय समिति एवं सक्रिय कार्यकर्ताओं ने निर्धारित समयानुसार सहभागिता की। विभिन्न परिजनों एवं कार्यकर्ताओं ने गायत्री मंत्र का जाप करते हुए माता भगवती देवी शर्मा जी के प्रति अपनी श्रद्धा एवं भावनाएं अर्पित कीं।

सांध्यकालीन सत्र में गायत्री शक्तिपीठ शंकरगढ़ की यज्ञशाला में वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी को उनके जन्म दिवस पर गायत्री दीपयज्ञ के माध्यम से भावांजलि एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई। शताब्दी वर्ष के लिए विशेष रूप से एक सौ दीपक प्रज्वलित कर परिजनों ने उनके त्याग, तप, साधना, सेवा और परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के साथ उनके अतुलनीय सहयोग एवं समर्पण को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।
इस अवसर पर विश्व कल्याण की प्रार्थना भी की गई। देश और अंचल में अच्छे मानसून एवं पर्याप्त वर्षा की कामना, भारत और भारतीय संस्कृति के प्रगति, उन्नति की मंगलकामनाओं के साथ माँ गायत्री एवं भगवान महाकाल के समक्ष भावपूर्ण आहुतियां समर्पित की गईं। साथ ही यह प्रार्थना की गई कि समस्त मानव समाज में सद्बुद्धि, सद्भाव, सेवा और संस्कारों का विस्तार हो तथा प्रत्येक व्यक्ति के अंत:करण में देवत्व का उदय हो।
इस अवसर पर गायत्री परिजनों ने परम पूज्य गुरुदेव के महान संकल्प “धरती पर स्वर्ग का अवतरण और मनुष्य में देवत्व का उदय” को साकार करने की दिशा में अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने और समाज में रचनात्मक चेतना के विस्तार में अपने अपने यथायोग्य योगदान का भी संकल्प लिया।
जन्मशताब्दी वर्ष के इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में गायत्री परिवार के विभिन्न प्रकोष्ठों एवं मंडलों के कार्यकर्ताओं सहित बड़ी संख्या में परिजनों ने सहभागिता की। आयोजन की जानकारी गायत्री परिवार रतलाम नगर ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी पातीराम शर्मा ने दी।