गौशाला तोड़ने को लेकर संत समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी, बोले- अतिक्रमण था तो इतने साल प्रशासन क्यों रहा मौन

रतलाम, 26 अगस्त ( News SSR )। जिले के ग्राम रत्तागढ़खेड़ा में गौशाला को तोड़े जाने के बाद विवाद बढ़ता जा रहा है। अब संत समाज ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। महामंडलेश्वर आनंदगिरीजी और पंचदशनाम अखाड़े के नरेंद्रगिरीजी ने प्रेसवार्ता में कहा कि वे अतिक्रमण के खिलाफ हैं, लेकिन रत्तागढ़खेड़ा में हुई कार्रवाई केवल गौशाला हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सनातन धर्म से जुड़े एक प्रकल्प को भी नुकसान पहुंचा है।

संतों ने कहा कि जनता की पाई-पाई जोड़कर गौशाला के लिए किए गए निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया। यदि प्रशासन को यह अतिक्रमण लगता था तो इसे तोड़ने के बजाय ग्राम पंचायत या प्रशासन अपने कब्जे में लेकर गौशाला का संचालन जारी रख सकता था। किसी अन्य संस्था को संपत्ति सौंपकर भी गौशाला संचालित की जा सकती थी।

ग्रामवासियों ने गोकर्ण महाराज को बुलाया था
महामंडलेश्वर आनंदगिरीजी ने कहा कि जिस स्थान पर गौशाला संचालित हो रही थी, वह पहले वीरान, गंदगी और गड्ढों से भरा हुआ था। ग्रामीण स्वयं गोकर्ण महाराज को वहां लेकर आए थे। उनके प्रयासों से जगह को समतल और व्यवस्थित किया गया तथा वहां गौमाता का पालन-पोषण शुरू हुआ।

संतों के अनुसार ग्राम पंचायत ने वर्ष 2025 में ग्रामसभा के माध्यम से गौशाला के संचालन पर आपत्ति नहीं होने का प्रस्ताव भी पारित किया था। उनका आरोप है कि कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से अराजक तत्वों ने ग्रामीणों को भड़काया और इसके बाद गौशाला तथा आश्रम से जुड़े संत गोकर्ण को बदनाम करने का प्रयास किया गया।

2011 से संचालित होने का दावा
संतों ने दावा किया कि रत्तागढ़खेड़ा में गौशाला वर्ष 2011 से संचालित हो रही थी और करीब 15 वर्षों तक प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि करीब चार महीने पहले नोटिस देने की कार्रवाई शुरू हुई और अब गौशाला को ध्वस्त कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि यदि जमीन पर अतिक्रमण था तो इतने वर्षों तक प्रशासन ने इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की। संतों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग सरकारी जमीन पर कब्जा कर खेती कर रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि कुछ ग्रामीणों ने गौशाला के अतिक्रमण की शिकायत करते हुए इसे हटाने की मांग की थी। इसके बाद प्रशासन ने मंगलवार को गौशाला को धराशायी कर दिया था और वहां मौजूद गायों को बिरमावल स्थित गौशाला में शिफ्ट किया गया।

संत गोकर्ण पर आरोप हैं तो सबूत पेश करें
संतों ने कहा कि यदि गोकर्ण महाराज के संबंध में किसी प्रकार के दुर्व्यसन या अन्य आरोप हैं तो प्रशासन या संबंधित लोग उनके प्रमाण प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो वे उनका समर्थन नहीं करेंगे, लेकिन कुछ लोगों द्वारा ग्रामीणों को भड़काकर सनातन धर्म से जुड़े प्रकल्पों को निशाना बनाया जाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

संत सम्मेलन के बाद आंदोलन की तैयारी
आनंदगिरीजी और नरेंद्रगिरीजी ने कहा कि रतलाम में जल्द ही संत सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसके बाद बड़े आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। संत समाज की ओर से रत्तागढ़खेड़ा सहित जिलेभर की गोचर भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने और संतों की सुरक्षा के लिए सरकार से मांग की जाएगी।

संतों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार के शासनकाल में संत ही दुखी रहेंगे तो इसका गंभीर परिणाम सामने आएगा। प्रेसवार्ता में गोकर्ण महाराज सहित अन्य संत एवं लोग भी मौजूद रहे।

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