आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर बस पंथ आम्नाय कस्तूरबा नगर में श्रद्धापूर्वक मनाया गया 1008 पुष्पदंत भगवान का मोक्ष कल्याणक, दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत ‘उत्तम शौच धर्म’ की हुई आराधना

रतलाम। ( News SSR )। श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, कस्तूरबा नगर में पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व के पावन प्रसंग पर धर्मानुरागियों ने 9वें तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 भगवान पुष्पदंत का मोक्ष कल्याणक अत्यंत भक्ति-भाव एवं उत्साहपूर्वक मनाया। इसके साथ ही दशलक्षण पर्व के क्रम में ‘उत्तम शौच धर्म’ की विशेष आराधना की गई।
प्रातःकाल वेदी पर विराजमान जिनेंद्र प्रभु का कलशों से अभिषेक, शांतिधारा एवं भक्ति के साथ पूजन संपन्न हुई । इसके पश्चात भगवान 1008 पुष्पदंतस्वामी के मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने भक्तिपूर्वक निर्वाण लाडू समर्पित कर जयकारे लगाए। संपूर्ण मंदिर परिसर ‘जय जिनेंद्र’ और ‘पुष्पदंत भगवान की जय’ के घोष से गूंज उठा।
उत्तम शौच धर्म पर रवि जैन ने ‘उत्तम शौच धर्म’ का महत्व बताते हुए कहा कि शौच धर्म का वास्तविक अर्थ मात्र बाह्य शारीरिक शुद्धि नहीं, बल्कि मन की शुद्धि और लोभ वृत्ति का त्याग है। लोभ समस्त पापों का मूल है। जब जीव मन से तृष्णा, परिग्रह और लालच का त्याग कर संतोष भाव धारण करता है, तभी हृदय में सच्ची पवित्रता प्रकट होती हे आज की पूजा शांति धारा का लाभ अभय शशि जैन एवं श्री अशोक मंजू पाड़लिया परिवार द्वारा प्राप्त किया गया एवं निर्माण लाडू का सौभाग्य अरुणा गोयल परिवार द्वारा प्राप्त किया गया जिसकी बहुत-बहुत अनुमोदना की गई।
पर्युषण पर्व में संध्याकालीन आरती एवं सांस्कृतिक गतिविधियां भी मंदिर की में रोज आयोजित हो रही है
इस अवसर पर मंदिर प्रबंध समिति के पदाधिकारी, वरिष्ठ श्रावक-श्राविकाएं एवं बड़ी संख्या में जैन समाज के धर्मावलंबी महेंद्र पाणोत, सरोज जैन, रवि जैन, रविंद्र जैन, प्रेमलता जैन, संजय नरसिंहपुरा,प्रियंका हवलदार, अर्चना हवलदार, उपस्थित रहे। अंत में सभी उपस्थित भक्तों में प्रभावना वितरित की गई।
उपरोक्त जानकारी मंदिर ट्रस्टी के अध्यक्ष अभय जैन द्वारा दी गई।