चातुर्मास में पुरूषार्थ से भाग्य को सौभाग्य की और ले जाए -श्रमण संघीय प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनिजी मसा

रतलाम, 24 जुलाई।( News SSR )भाग्य पुण्य से मिलता है, लेकिन सौभाग्य पुरूषार्थ से मिलता है। रतलाम वालों को पुण्य से चातुर्मास मिला है, इसे तप, त्याग, तपस्या का पुरूषार्थ कर सौभाग्य की और ले जाए। जीवन में ऐसे मौके बार-बार नहीं आएंगे। 

यह बात यह बात मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने कही। मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में शुक्रवार सुबह प्रवचन देते हुए उन्होंने भाग्य को सौभाग्य में बदलने की प्रेरणा देते हुए कहा कि भाग्य में पुण्य भी है और पाप भी है। पुण्य फलता है, तो सब कहते है, तेरा भाग्य अच्छा है, लेकिन पाप का उदय हो, तो भाग्य अच्छे नहीं कहा जाता है। भाग्य, कर्म का फल होता है और कर्म पुण्य और पाप दोनो की और ले जाते है। हमे पुण्य से मनुष्य भव मिला है, जिन शासन मिला, इसे व्यर्थ नहीं जाने दे और सदकर्म कर अपने कर्मों से भाग्य को सौभाग्य में बदलने का प्रयास करे।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि जीवन में सदगुरू का बडा महत्व होता है। संत कई मिलते है, लेकिन सदगुरू नहीं मिलते। सदगुरू ही सही रास्ता दिखाते है। सौभाग्य नाम सबकों बडा प्रिय है और हमारा भाग्य है कि हमे सौभाग्य जैसे गुरू मिले। देव, गुरू, धर्म पर श्रद्धा, आस्था और दृढता रखने से भाग्य उदय नहीं होता, वह पुरूषार्थ से होता है। सबकुछ भाग्य से मिलता है, लेकिन सौभाग्य से ही फलता है। जीवन में मिलना महत्वूपूर्ण नहीं, अपितु फलना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए चातुर्मास में तप, त्याग और तपस्या का अधिक से अधिक पुरूषार्थ करे और अपने भाग्य को सौभाग्य बनाए।
धर्मसभा के आरंभ में जाप किए गए। प्रवर्तकश्री से राकेश छाजेड ने 9 उपवास, भंवरलाल वोरा ने 5 उपवास एवं अन्य गुप्त तपस्वियों ने अलग-अलग तप आराधना के प्रत्याख्यान लिए। विनोद ज्ञामर ने 3 उपवास की तपस्या पूर्ण की। इस दौरान सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी मसा, उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8 एवं महासती श्री चंदनबालाजी मसा एवं सेवाभावी श्री कल्पनाजी मसा सहित श्री धर्मदास जैन श्री संघ सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे। संचालन श्री संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश मूणत ने किया।

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